शनिवार, 6 अगस्त 2011

जख्म, तकदीर और मैं

जख्म भरता नहीं.. दर्द थमता नहीं,

कितनी भी कोशिश कर ले कोई,

तकदीर का लिखा मिटता नहीं ...

चलता ही रहता है, जिंदगी का सफ़र,

कोई किसी के लिए, यहाँ रुकता नहीं..

खुद ही सहने होंगे सारे गम,

किसी की मौत पर कोई मरता नहीं,

हंसने पर तो दुनिया भी हंसती है संग,

हमारे अश्को पर, कोई पलकें भिगोता नहीं ...

आज दर्द हद से गुजर जायेगा जैसे,

कोई बढ़कर साथ देता नहीं,

जिंदगी तुझसे गिला भी क्या करे,

वक़्त से पहले, तकदीर से ज्यादा,

किसी को कभी, मिलता भी नहीं ...

!!अनु!!

5 टिप्‍पणियां:

  1. bahot khoob SAKHI ANU....
    jeena hota hai khud se khud ke liye..koi kisi ke liye yaha jeeta nahi....

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  2. खूबसूरत ख्यालात.
    सुन्दर प्रस्तुति.
    आभार.

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  3. जख्म भरता नहीं.. दर्द थमता नहीं,

    कितनी भी कोशिश कर ले कोई,

    तकदीर का लिखा मिटता नहीं ...सत्य वचन

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सखियों आपके बोलों से ही रोशन होगा आ सखी का जहां... कमेंट मॉडरेशन के कारण हो सकता है कि आपका संदेश कुछ देरी से प्रकाशित हो, धैर्य रखना..