मंगलवार, 3 नवंबर 2015

बाजरे की रोटी

बाजरा रेगिस्तानी सूखे इलाको की पैदावार है छोटे गोल और  हरे रंग महीन दाने खाने में स्वादिष्ट होते है इन्हें अक्सर गाँवो में बड़े चाव से आटा पिसवा कर रोटी बना कर गुड़ के साथ खाया जाता है सर्दियों में बाजरी की रोटी बहुत गुणकारी होती है इसे खाने से शरीर में ऊर्जा लम्बे समय तक बनी रहती है ।

बाजरी की रोटी बनाने की विधि - बाजरी के आटे में लोच कम होता है इसीलिए कम पानी के साथ गोंदा जाना बेहतर रहता है अन्यथा आटा गीला ज्यादा हो जाय तो रोटी बनाने में कठिनाई आती है इसे हाथ से थाप दे देकर बनाया जाता है रोटी बनाते समय हाथो को निश्चित शेप के साथ रोटी पर दबाव बनाते जाए तो रोटी आसानी से बन जाती है थोड़े अभ्यास के बाद बाजरे की रोटी बनने लगती है रोटी के शेप में आने के बाद इसे चूल्हे पर तवा रख कर  सेंक सकते है गैस पर भी इसे बनाया जा सकता है रोटी के  सिकते समय रंग बदलने के साथ सावधानी पूर्वक इसे पलट दे और रोटी में कडा पन आ जाने के बाद तवा हटा कर सीधे चूल्हे पर रख कर चिमटे की सहायता से सेक ले, रोटी सिक जाने पर इस पर देशी और गुड़ के साथ लगा कर खाये या सांगरी केर की राजस्थानी साग के साथ इसे खाया जा सकता है ।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (17-11-2015) को "छठ पर्व की उपासना" (चर्चा-अंक 2163) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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सखियों आपके बोलों से ही रोशन होगा आ सखी का जहां... कमेंट मॉडरेशन के कारण हो सकता है कि आपका संदेश कुछ देरी से प्रकाशित हो, धैर्य रखना..