मंगलवार, 5 जुलाई 2011

आ सखी चुगली करे

नयी सखियों का चुगलखाने में स्वागत है आते ही उनका" उलटवार प्रशन" मुझे पसंद आया क्योकि बहुत सी महिलाए बस अपनी इसी' कला " का इस्तेमाल कम करती है,, आपका प्रशन है की इस ब्लॉग का नाम आ सखी बाते करे भी हो सकता था 
चुगली शब्द नेगेटिव सेन्स देता है


यदि ब्लॉग का नाम होता' आ सखी बुराई करे "...तो ..यहाँ नेगेटिव सेन्स आ सकता था चुगली शब्द कुछ अलग हट कर करने को प्रेरित करता है , " चुगली'' --- वो है जो करने के बाद दिल हल्का हो


दिमाग का खुल कर इस्तेमाल हो ,यह वह कला है जिसमे पारंगत होना हरेक के बस में नहीं ,जहा इसमें इमली सा खट्टापन होता है तो कही चाट सा चटपटापन ..आपकी .कुछ ऐसी बाते भी सामने आये जो आपको दुसरो से जुदा बनाती हो


...अब यह तो आप सभी पर निर्भर करता है की आप इस ब्लॉग का कितना और कैसे उपयोग करती है ,,,मैंने अपनी तरफ से सभी सखियों को'" सखी "का दर्जा देकर उन्मुक्त उड़ने की जगह भर दिखाई है जहा हम सब मिल कर कई रंगों से रंगा सपना देखे, कभी आसमान छूने का तो कभी कल-कल बहती नदिया कि लहरे बन कर समुंदर में गोते लगाने का तो क्यों ना इस इन्द्र धनुषी झूले में हम सब मिल कर बैठे और गाये 


...सखी रे आ बावरी चुनरिया ओढ़े..

2 टिप्‍पणियां:

  1. जी में भी सहमत हूँ...चुगली खटी मीठी भी हो सकती है..पर चुगली ऐसी होनी चाहिए जो किसी के दिल को चोट न पहुंचाए...चुगली तो समाज के ठेकेदारों पर भी हो सकती है जिन्होंने अलग अलग इंसान के लिए अलग अलग नियम बनाये हैं...

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  2. aji chugli ka apna ek swad hai...samjho to ye bhi jeevan ka pyara sa ahsas hai...sun ne wale ki ruk jati dhadkan pal bhar ko...aur jiski ho rahi chugli..uski..to atak jaati halak me saans hai..CHUGLI TO CHUGALI HAI SAKHIYON...CHUGLI..KARO...CHUGLI SUNO...BHARPUR AANAND UTHAO IS AHSAS KA..

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सखियों आपके बोलों से ही रोशन होगा आ सखी का जहां... कमेंट मॉडरेशन के कारण हो सकता है कि आपका संदेश कुछ देरी से प्रकाशित हो, धैर्य रखना..