शनिवार, 9 जुलाई 2011

बस एक ख्‍वाब और...

ना ख़त्म हुआ उनकी मंजिलों का सफ़र ,,
इंतज़ार की हमारे इन्तेहाँ हो गई*
हर मंजिल पर पहुँचने के बाद 
वो कहते हैं ''बस एक ख्वाब और''

5 टिप्‍पणियां:

  1. हरेक दिल की उजास है ये...

    बहुत खूब सीमाजी

    उत्तर देंहटाएं
  2. जन्माष्टमी की शुभ कामनाएँ।

    कल 23/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

सखियों आपके बोलों से ही रोशन होगा आ सखी का जहां... कमेंट मॉडरेशन के कारण हो सकता है कि आपका संदेश कुछ देरी से प्रकाशित हो, धैर्य रखना..