सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

"जमाई षष्ठी "

"जमाई षष्ठी"

आज मैं आपको बंगाल के एक विशेष त्यौहार के
बारे में बताने जा रही हूं,जो शायद बंगाल 
के अलावा कहीं नहीं मनाया जाता।
बंगाल में रहने वाले सभी इसे जानते हैं।

बंगाल त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है, यहां 12 महीने में 13 त्यौहार मनाए जाते हैं , सभी धर्म के लगभग सभी त्यौहार यहां सद्भावना पूर्वक मनाया जाता है। 

पश्चिम बंगाल में मनाया जाने वाला सबसे प्रमुख त्यौहार दुर्गा पूजा है, और यह पूरे 9 दिन उत्साह के साथ मनाया जाता है। जिसमें मां दुर्गा की आराधना और पूजा-अर्चना की जाती है।
 यहां मनाए जाने वाले अन्य त्योहारों में काली पूजा, बसंत पंचमी, भाई दूज, दशहरा, होली, महावीर, जयंती, बुद्ध जयंती, रथ यात्रा, आदि है।
 यहां कई महापुरुषों के जन्मदिन भी त्योहारों के जैसे बनाए जाते हैं। जैसे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म दिन, श्री रामकृष्ण परमहंस का जन्मदिन, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन भी त्योहारों की भांति मनाया जाता है।

अब मैं आपको बताने जा रही हूं
एक अनोखे त्यौहार के बारे में
नाम है 'जंवाई षष्टी' 

 कोलकाता में 'जामाई षष्ठी'  नामक एक खूबसूरत त्यौहार मनाया जाता है। जामाई को कई जगह दामाद, मेहमान इत्यादि भी कहा जाता है। जामाई षष्ठी एक ऐसा त्यौहार है जो जामाई को अपने ससुराल पक्ष से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। यह त्यौहार ससुरालवालों के साथ दमाद के सुंदर बंधन को भी प्रदर्शित करता है। जामाई षष्ठी का पारंपरिक त्यौहार महिलाओं की सामाजिक-धार्मिक तथा कर्तव्य के हिस्से के रूप में पैदा हुआ था। दामाद को 'जामाई'  और ‘षष्ठी' ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के छठे दिन को कहते हैं। जिसका अर्थ छठा दिन है।  इस प्रकार यह त्यौहार परंपरागत हिंदू कैलेंडर के ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष के छठे दिन मनाया जाता है। 

अब मैं आपको इसको मनाने की विधि
बताने जा रही हूं।
कुछ शब्द बंगाली  के भी लिखी हूं।
ताकि लगे बंगाली त्यौहार है।
तो लो  सखियों पढ़ें बंगाल के इस 
अनोखे त्यौहार केबारे में.................

यह त्यौहार  सामाजिक रिवाज़ मजबूत कर पारिवारिक बंधन की नींव रखता है। इस दिन लड़की के घर वाले अपने-अपने जमाइयों की खूब आव-भगत करते है। दामाद अपने ससुराल वालो को ‘शोशूर बारी’ भी कहता है। जामाई षष्ठी पश्चिम बंगाल में हिंदू परिवारों के द्वारा बरसों से मानाई जाती रही है। इस त्यौहार में लड़के के ससुराल वाले जमाई और बेटी को पहले से ही निमंत्रण भेज बुला लेते हैं और उनका आदर- सत्कार करते हैं। जमाई के लिए कई आयोजन भी किए जाते हैं। सास विशेष व्यंजन बनाती हैं और अपनी बेटी और दामाद को सम्मानित करती हैं। बंगाल में इस दिन अनिवार्य रूप से हिल्सा मछली बनाई जाती है। जमाई षष्ठी को लेकर इन दिनों बाजार में हिल्सा मछली की कीमत बढ़ जाती है। वैसे शहर में इस मछली की आवक कम है। इसलिए एक हजार से 15 सौ रुपए प्रतिकिलो बिकती है। जमाई षष्ठी के दिन इसकी मांग को देखते हुए कीमत और भी बढ़ जाती है। इस दिन के लिए हिल्सा मछली कोलकाता से मंगाई जाती है। जमाई षष्ठी के लिए दुकानें भी सज जाती है। बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। ससुराल पक्ष बेटी-जमाई को देने के लिए कपड़े इत्यादि की खरीदारी करते हैं।
दामाद का किया जाता है भव्य स्वागत
जमाई षष्ठी बंग समुदाय का पारंपरिक पर्व है। इसमें दामाद ससुराल जाते हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाता है। दामाद और बेटी के घर पहुंचने पर थाली में धान, दुर्बा और पांच प्रकार का फल रखकर सास पूजा करती है। धान और दुर्बा घास को माथे पर स्पर्श कराया जाता है। यह आशीर्वाद का प्रतीक होता है। माथे पर दही से एक फोटा (तिलक) लगाया जाता है। इसके बाद पीला धागा (षष्ठी धागा) जिसे 'षष्ठी सूतो' भी कहते हैं सास उसे जामाई के हाथ पर बांधती है। धागा हल्दी के साथ रंगीन पीला रंग का होता है इसमें मां षष्ठी का आशीर्वाद होता है जो बच्चों की देखभाल करता है। वहीं, परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर भोजन ग्रहण करते हैं। दामाद के स्वागत में अनेक प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं। क्षमता के मुताबिक उपहारों का आदान-प्रदान भी किया जाता है। दामाद को उपहरा, मिठाई और फल दिए जाते हैं। जिसके बाद दामाद भी सास को उपहार भेंट करता है। तब सास उस अनुष्ठान को निष्पादित करती है जिसमें जमाई के माथे को छह फलों वाले प्लेट को छुआया था।  यह दिन कई अन्य क्षेत्रों में अरण्या षष्ठी के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्यौहार विशेष रूप से दामाद यानि जामाई को ससुराल पक्ष के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इस प्रकार यह पारिवारिक संबंधों को सुरक्षित और मधुर बनाने में मदद करता है। बंगाली भोजन अपने प्यार के लिए प्रसिद्ध हैं। अनुष्ठान करने के बाद एक छोटा सा त्यौहार आयोजित किया जाता है। दामाद के सबसे अच्छे और पसंदीदा व्यंजन तैयार किए जाते हैं। मेहमानों को बंगाली व्यंजन परोसा जाता है। विभिन्न मछली व्यंजनों, प्रवण मलिकारी और सबसे प्रसिद्ध बंगाली मीठा 'सोंदेश'  अवश्य शामिल होता है। मूल रुप से यह त्यौहार दामाद को केंद्रित करता है। दामाद सबका ध्यान अपनी और आकर्षित करता है और अपने ससुराल पक्ष के मान-सम्मान और प्यार का लुत्फ उठाता है।
चलिए पढ़कर आंनद लिजिए.................

लेखिका- सुषमा शर्मा 

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