गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

गणेश चतुर्थी

शनिवार सखी प्रतियोगिता
# त्योहार#  दिवस# प्रतियोगिता

  # गणेश चतुर्थी#
 नमस्कार  सखियों अपने भारत में इतने सारे त्यौहार देखे हैं उनमें से एक हैं गणेश चतुर्थी गणेश चतुर्थी इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था इन्हें ज्ञान बुद्धि धर्म का बहुत ही ज्यादा मान्यवर देवता माना गया है गणेश गणेश की उपासना करने से सारे काम सफल हो जाते हैं और कहते हैं गणेश की अपनी माता के बहुत चाहते थे गणेश जी का जन्म माता ने शरीर पर लगाई उत्तम से हुआ माता पार्वती ने अपने शरीर पर लेप लगाया था उस लेप को हटाने पर भगवान गणेश का सृजन हुआ कहते हैं कि तब से गणेश चतुर्थी मनाते हैं माता पार्वती नहाने के लिए गई थी उन्होंने गणेश को कहा दरवाजे पर रुके निगरानी इतने में भगवान शंकर आ गए भगवान शंकर ने कहा वह अंदर जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें पार्वती से बात करनी है गणेश ने उन्हें इनकार कर दिया क्योंकि पार्वती ने उसे कहा था निगरानी रखने के लिए और कोई अंदर ना आए लेकिन भगवान शंकर को ना जाने पर भगवान शंकर को क्रोध आ गया और भगवान श्री गणेश का सिर काट दिया सबसे पहले गणेश चतुर्थी छत्रपति शिवाजी ने मेरठ में मनाई थी कहते हैं गणेश चतुर्थी की शुरुआत की उन्होंने ही सबसे पहले की थी भगवान गणेश पूजनीय माने जाते हैं भगवान गणेश के रोकने पर श्री जी ने उनका सिर काट दिया उनको क्रोधित होकर पार्वती ने काली का रूप धारण कर लिया शिव शंकर ने जब उनका भयंकर रूप देखा तो उन्होंने इस बात को बड़े ध्यान से सुना तब उन्हें पता चला इसमें गणेश की कोई गलती नहीं है तो उन्होंने अपने परिजनों से कहा आप उस बच्चे का सर लेकर आए जिसका सिर दक्षिण की तरफ मुंह करके सोया हो और उसकी मां उसकी तरफ पीठ करके बैठी हूं सारे जन गए उन्हें हथनी का बच्चा मिला उसकी मां उसकी तरफ पीठ करके बैठी हुई थी हथिनी के बच्चे को घर ले आए और गणेश के धड़ पर लगा दिया पुनर्जीवन हुआ और कहते हैं इसी दिन को पूरे धूमधाम से महाराज ने गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है और हम भी घर पर गणेश जी को लाते हैं और 10 दिन तक उन्हें विराज कर उनकी पूजा अर्चना करते हैं भोग लगाते हैं और बहुत आनंद करते हैं और हर साल गणेश चतुर्थी का हमें इंतजार रहता है बच्चे भी बहुत खुश होते हैं गणेश जी की आरती गाकर तरह तरह के पकवान बनाते हैं लड्डू पेड़े का भोग लगाते हैं बोलो गणपति बप्पा मोरिया मंगल मूर्ति मोरिया
लेखिका- सोनू आशीष

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