रविवार, 9 फ़रवरी 2020

"गणगौर का त्यौहार" राजस्थान



 गणगौर 

हमारे यहाँ गणगौर का त्यौहार हर्ष उल्लास के साथ मनाते है 
मे बचपन में ये त्यौहार करती थी लेकिन शादी के बाद ससुराल में नहीं करते ।। 

लेकिन यह त्यौहार मे बचपन में कैसे करती थी वो आज बताऊँगी

यह वृत सभी सूहागीन औरते लडकीया कर सकती हैं ।।

मे बता रही हूँ  पहले दिन से शूरू कर के सत्रह तक की पूजा 

यह होली के दूसरे दिन (चैत्र मास की प्रतिपदा से) छारनडी वाले दिन से शूरू हो कर चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तक मनाने वाला मेरा सबसे पसंदीदा तयौहार हूआ करता था ।।

यह सत्रह दिन की गणगौर पूजा कन्या जिस को मासिक धर्म नही आता हो (रजसवला )वही कर सकती हैं ।।

हम होली के दूसरे दिन मिट्टी का बना हुआ कटोरा जिस को हम कुन्डलीया बोलते हैं ।।

कुन्डलीये के अंदर बालू  रेत में गेहूं डाल कर उगाते थे उसे दूब कहते हैं ।।
हम आठ दस सहेलीया मिलकर एक जगह ही करती थी ,सुबह स्कूल जाने से पहले हम अपने अपने घर से लोटा भरकर जल लेकर जाती थी और गवर माता को सच्चे मन से जल अर्पित करती थी और मेरे दादी जी हमे गवर माता की कथा सुनाती थी  ।।

रविवार के दिन हम जंगल मे तालाब से जल लेने जाती थी और गीत भी गाती थी ।। उस समय फोन नही थे तो हम स्टूडियो वाले चाचा जी को तालाब पर साथ लेकर जाते थे मेरे पास उस समय का एक ही फोटो है।।

गवर ए गणगौर माता खोल ए किवाडी 
बाहर ऊभी तारी पूजन आली 

सात दिन बाद शीतला सप्तमी के दिन से घूडला पूजा शूरू हो जाता ।।

घूडला मिट्टी का बना हुआ जाली की तरह बना हुआ होता है ।।

घूडला लेकर घर घर फिरते थे और गीत भी गाती थी 
मुझे गीत याद नही है ।। 

शाम के समय गवर माता की आरती भी करती थी 
सत्रहवे दिन गणगौर वृत करती और शाम को गवर माता और घूडले की  धूम धाम से शादी करती थी कोई गवर माता मा बनती तो कोई पिता कोई ससुराल वाले पूरी रीति रिवाज के साथ हम गवर माता का विवाह सम्पन्न करते ।।

दूसरे दिन सुबह सुबह छः बजे ममी उठा कर कहती मधु आज तेरी गवरा की विदाई है ।।

और ममी मुझे मिठाई नमकीन डाल कर देती हम सभी सहेलीया इकठ्ठा  होकर गवर माता को लेकर कुएँ के पास जाती और जो भी कुछ खाने का सामान घर से लेकर आती वो गवर माता को चढा कर सुबह छः बजे खुद भी खाती 😍

और गवर माता को कुएँ में डाल कर उन से अच्छे वर की कामना करती 

मेरी माँ आस पडोस की औरते हमे कहती की गवर माता से अच्छे घर वर की मांग करना  गवर माता से 🙏 हम ऐसे ही करती थी ।।

गवर माता की कृपा से मुझे बहुत अच्छा घर वर मिला 
मेरे ससुराल में यह त्यौहार नही करते इसलिए मैं इस त्यौहार से वंचित हू ।
मेरी गवर माता से प्रार्थना है मेरी बेटी को भी अचछा घर वर देना ।।🙏🙏 गवर माता की जय 🙏
   लेखिका, " माधुरी गुचिया"
 

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