सोमवार, 6 फ़रवरी 2012


बेरोजगार बेटे का दर्द ------

माँ करना तू सब्र ज़रा सा ,अपना भी दिन आयेगा


मुरझाया चेहरा तुम्हारा , जब एक दिन खिल जाएगा

पहला दिन मेरे जीवन का ,जब में ऑफिस जाउंगा


पेंट शर्ट और टाई लगा कर ,थोड़ा सा इतराऊंगा ........

भरपूर नज़र से जब देखोगी ,माँ में शरमा जाउंगा


स्वप्न तुम्हारी आँखों का माँ ,सच में 'सच' कर पाउँगा .....

माँ निराश ना होना तुम बस ,आशा दीप जला रखना


परिस्थितियों के तूफानों से ,उसको ज़रा बचा रखना .....

'नाकारा' ना मुझे समझना ,तेरा दर्द समझता हूँ


माथे पर जो खींची लकीरें ,उनका मर्म समझता हूँ ......

पापा को भी कहना माँ तुम ,में सपूत कहलाउंगा


नाम करूंगा रोशन उनका , कालिख नहीं लगाउंगा

प्यार और विश्वास चाहिए ,तेरा आशीर्वाद चाहिए


आँचल में छिपा ले माँ तू , मुझको तेरा साथ चाहिए ......

स्त्री

कभी कभी 'मन'
बड़ा व्याकुल हो जाता है,
संशय के बादल, घने
और घने हो जाते हैं,
समझ में नहीं आता,
स्त्री होने का दंभ भरूँ,
'या' अफ़सोस करूँ...

कितना अच्छा हो,
अपने सारे एहसास,
अपने अंतस में समेट लूँ,
और पलकों की कोरों से,
एक आँसूं भी न बहने पाए....

यही तो है,'एक'
स्त्री की गरिमा,
'या शायद'
उसके, महान होने का
खामियाजा भी...

क्यूँ एक पुरुष में
स्त्रियोचित गुण आ जाये,
तो वो ऋषितुल्य हो जाता है,
'वहीँ'
एक स्त्री में पुरुषोचित
गुण आ जाये तो 'वो'
'कुलटा'

विचारों की तीव्रता से,
मस्तिस्क झनझना उठता है,
दिल बैठने लगता है,
डर लगता है
ये भीतर का 'कोलाहाल'
कहीं बाहर न आ जाये,
और मैं भी न कहलाऊं
'कुलटा'.....!!अनु!!

**********************************

जब कभी मन उद्वेलित होता है,
'तब'
जी करता है की 'चीखूँ'
जोर से 'चिल्लाऊं'
जार जार रोऊँ ..
'लेकिन फिर'
आड़े आ जाती है
'वही'
स्त्री होने की गरिमा ..
लोग क्या कहेंगे?
पडोसी क्या सोचेंगे?

ठूंश लेती हूँ,
अपना ही दुपट्टा,
अपने मुंह में,
'ताकि'
घुट कर रह जाये
मेरी आवाज़,
मेरे ही गले में...

और घोंट देती हूँ,
अपने ही हाथों
'गला'
अपने 'स्वाभिमान' का.... !!अनु!!


बुधवार, 4 जनवरी 2012


सखियों ये .....एक कल्पना !!! .पुलकित मन की .......

प्रथम समर्पण कैसा होगा 


मिलन हमारा कैसा होगा,

सबल भुजा वो मेरी होगी

 ,
अस्तित्व समर्पित तेरा होगा,

स्पर्श प्रथम तेरे अधरों का 



कपित अधरों से कैसा होगा,

सहमा और अपने में सिमटा



प्यार तुम्हारा कैसा होगा,

मंद मुस्कान और नयन लजीले



कोमल कपोल पर अलक हठीले,


कल्पित ह्रदय स्पंदित होता


उद्भ्रान्तित क्षण वो कैसा होगा,


स्पर्श तुम्हारा कैसा होगा 

प्यार तुम्हारा कैसा होगा .........?????